प्रेगनेंसी के दौरान क्या ना करें ,और कैसे रखे अपना ध्यान

महिला का जीवन तभी पूर्ण होता है जब वह माँ बनती है| किसी युवती के लिये पहली बार माँ बनना एक अनोखी और चुनौती वाली क्रिया होती है| जैसे ही महिला गर्भधारण करती हैं वैसे ही गर्भधारण करने के बाद से महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव शुरू हो जाते हैं| और यह बदलाव पहले महीने से शुरू हो जाते हैं| इसीलिए गर्भावस्था के पहले महीने से ही गर्भवती महिला को कुछ सावधानियां बरतनी शुरू कर देनी चाहिये | महिला को सभी चीजो जैसे, ये सावधानियाँ खान-पान, रहन-सहन, चलना-फिरना, सेक्स आदि के तरीकों में बदलाव करना पड़ता है| क्योंकि गर्भावस्था में महिला द्वारा किये गए हर काम का सीधा प्रभाव शिशु पर जाता हैं| और ऐसे में होने वाले माता-पिता को अपने बच्चे की देखभाल, का जब वो माँ के गर्भ में है या फिर जन्म लेने के बाद आप उसका पूरा ध्यान रखेंगे| जो महिला पहली बार माँ बन रही होती हैं उसे हर समय अपने डॉक्टर या फिर अपने बडों से इस बारे में राय लेते रहना चाहिए|

 

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प्रेगनेंसी में क्या न करें

  1. भारी वजन न उठाएँ ,जैसे कि पानी से भरी बाल्टी ,सिलबट्टा ,भारी कुर्सी |
  2. बहुत देर तक ना खड़े रहें ,यदि आपको किचन में बहुत देर तक खड़ा होना पढता है तो चाहें तो वहां एक कुर्सी रख लें |
  3. सीढ़ियों का प्रयोग कम से कम करें ,यदि आप ground floor पर नहीं रहती हैं और मजबूरी में आपको नीचे जाना पढता है तो कोशिश करिये कि आप एक बार ही में अपने सारे काम निपटा लीजिये ,इसके लिए एक कार्य सूची बना लेना उचित होगा ,सीढिया ,रेलिंग पकड़ कर ही उतरें |
  4. हील वाली सैंडल या चप्पल ना पहनें ,हमेशा फ्लैट चप्पल ही पहनें ,यदि आप ऑफिस जाती हैं तो फ्लैट सैंडल्स का ही प्रयोग करें |
  5. गरभवती महिलाओ के लिए बहुत जरुरी हैं की वो अच्छी नींद ले| जिससे उन्हें पूरी तरह से आराम मिल सके| और आपको इस समय पर कोशिश करनी चाहिए की हो सके तो दिन के समय भी सोना चाहिए| यदि आपका शरीर रिलैक्स रहेगा तो इससे आपको आराम मिलेगा| और आपकी नींद कम से कम दिन में 8 घंटे की तो होनी ही चाहिए| इससे आपका बच्चा भी अच्छे से बढ़ सकेगा| तो आप गर्भावस्था में अपनी नींद का पूरा ख्याल रखे|
  6. यदि आपको सिगरेट आदि का सेवन करते हो तो उसे तुरंत छोड़ दे। क्योंकि धूम्रपान करते समय जो धुआं निकलता है वो बहुत हानिकर होता है।
  7. धूम्रपान करने से आपको गरभपात Pre-term delivery जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त आपका बच्चा मोटापे का शिकार भी हो सकता है। Pregnancy Care.
  8. तला और मसालेदार न खाएं। इनसे गैस, एसिडिटी, जलन हो सकती है। जो भी खाएं, फ्रेश खाएं। बाहर के खाने से इंफेक्शन का खतरा होता है।
  9. ज्यादा ड्राइविंग न करें। .
  10. लंबी यात्रा न करें।
  11. रस्सी न कूदें।
  12. कमर से झुकने के बजाय घुटने मोड़कर बैठें।
  13. बिना डॉक्टर की सलाह कोई दवा न लें।
  14. र्भावस्था के समय में महिलाओ को बहुत सी परेशानिया हो सकती हैं| ऐसे में महिलाओ को ध्यान रखना चाहिए, की वो भारी सामान न उठाये, पेट के बल लगकर कोई काम न करे, पैरो के भर न बैठे, झुकने से परहेज करे, ज्यादा देर तक कड़ी न हो, ज्यादा एक्सरसाइज न करे, आदि ये सब कुछ बाते हैं जिनका ध्यान गर्भवती महिला को गर्भावस्था के समय रखना चाहिए| इसके आलावा आपको ऊंचाई पर चढ़ने से भी परहेज करना चाहिए|

प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान करना

  1. इस समय ध्यान करने से आपके शरीर का अपने-आप उपचार होने लगता है और बच्चे की भी सेहत अच्छी बानी रहती है।
  2. ध्यान शरीर में जीवन शक्ति का संचार करता है तथा प्राण ऊर्जा बढ़ाता है। इस समय पर आपको बच्चे के विकास के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है तथा ध्यान करने से शरीर में उर्जा का प्रतिपादन होता है। ध्यान का अभ्यास करना मां और बच्चे दोनों के लिए ही बहुत लाभदायक है।
  3. मन का संतुलन खराब होना तथा मानसिक उथल-पुथल गर्भावस्था में सामान्य बात है। जैसे जैसे बच्चे की संवेदनाएं विकसित होती हैं वैसे वैसे बच्चा आपकी सारी संवेदना ही महसूस करने लगता है। इसलिए इस समय पर प्रसन्न रहना, आरामदायक स्थिति में रहना तथा शांत रहना अति आवश्यक है। सहज समाधि मैडिटेशन इस समय पर करना बहुत अच्छा है आपके लिए भी और बच्चे के लिए भी। वास्तव में इस समय पर आप को दिन में तीन से चार बार सहज मंत्र का स्मरण करना चाहिए।
  4. ध्यान मन को विश्राम देता है जिससे भावनात्मक असंतुलन को झेलना आसान हो जाता है। यह शरीर को विश्राम देने का श्रेष्ठ उपाय है। यह रीढ की हड्डी पर पड़ने वाले दबाव को कम कर देता है जिसके कारण आप गर्भावस्था के अंतिम चरण में भी आरामदायक स्थिति में रह सकती हैं।
  5. व्यस्त जीवनशैली के कारण उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह हो जाना सामान्य बात है। ध्यान करने से इन दोनों पर रोक लगाई जा सकती है, इससे मां के पास सामान्य प्रसव करने के अधिक अवसर होंगे।

एक पौष्टिक भोजन विधि – गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए:

सामग्री:

  • खुबानी या अंजीर – 250  ग्राम
  • काले खजूर – 250  ग्राम
  • बादाम – 60 ग्राम
  • पिस्ता बिना नमक का – 100  ग्राम
  • खीरे के बीज – 100 ग्राम
  • सूरजमुखी फूल के बीज – 100  ग्राम
  • कद्दू के बीज – 100  ग्राम
  • खरबूजे के बीज – 100 ग्राम
  • अखरोट – 100 ग्राम
  • चिरौंजी (चारोली) – 50 ग्राम
  • नटमेग – 3  न.
  • इलायची – 25 ग्राम
  • केसर – 2 तार

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बनाने की विधि

  1. खुबानी,अंजीर और काले खजूर को बारीक काट लें।
  2. बादाम, पिस्ता, खरबूजा, सूरजमुखी, कद्दू और खीरे के बीजों को पीस लें। अखरोट, चिरौंजी, इलाइची और नटमेग पाउडर को भी अच्छी तरह मिला दे।
  3. सबको अच्छी तरह मिला लें, इनको आटे की तरह गूंधकर थाली में फैला दें।
  4. चौकोर टुकड़ों में काटें।

रोज सुबह, एक टुकड़ा गर्म दूध के साथ खाएं।

 

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